कालसर्प दोष निवारण पूजा

 

पंडित . देव कुमार शर्माजी त्र्यंबकेश्वर मे रहते है । पंडित संपूर्ण पूजाविधी शास्त्रोक्त और वेदोक्त तरीकेसे करवा लेते है । ब्रम्ह, विष्णु, महेश विशेष रूप से एक ही स्थान पर है, इसीलिए एक महत्वपूर्ण रस्म है। त्रिम्बकेश्वर यह १२ ज्योतिर्लिंगो मेसे १० व स्वयंभू ज्योतिर्लिंग है। पंडितजी यहापे कालसर्प पूजा, त्रिपिंडी श्राद्ध, नारायण नागबली, नक्षत्र शांती, रुद्राभिषेक, लघुरुद्र और इतर विधी शास्त्रोक्त पद्धतीने करते है।

कालसर्प योग का विचार करनेसे पहले राहू केतू का विचार करना आवश्यक है| राहू सर्प का मुख माना गया है| तो केतू को पुँछ मानी जाती है| इस दोग्रहोंकें कारण कालसर्प योग बनता है| जन्मकुंडली में यह दोनों ग्रहोंकें बीच शुभ ग्रह आ गये तो वह कालसर्प योग का चिन्ह होता है| हिरण्यकश्यपूकी पत्नि सिंहिकासे राहू का जन्म हुआ है| समुद्रमंथनसे प्राप्त हुआ अमृत प्राप्त करने के लिए राहू देव समुहमे जाकर बैठे| वह अमृत प्राशनकरनेही वाला था तो चंद्र सूर्य ने मोहिनी को इशारा किया|मोहिनी रूप विष्णूने तत्काल राहू का शिरच्छेद किया| अत: उसके शरीरके पूर्व भाग को राहू और उत्तर भाग को केतू कहने लगे| तभी नवग्रह में उन्हे स्थान प्राप्त हुआ|

राहू के वजहसे ही कालसर्प योग बन सकता है| वैदिक कर्मकांड में राहू को आदि देवता काल माना गया है, और प्रत्याधिदेवता सर्प को माना गया है| इसलिए राहू दूषित होनेसे कालसर्प योग बनता है| राहू यदी शुभास्थिती में हो तो भाग्यदायक और पराक्रमी होता है| उनका प्रभुत्व मंत्र तंत्र अघोरीविद्याओके साथ होता है| यदी राहू दुषित हो तो स्मृतिनाश, अपकिर्ती पिशाच्चबाधा संतति को कष्ट अपाय करता है|अनेक कार्योंमे विलंब अथवासफलता मिल सकती है| हर कार्य आसान होने के लिए वैदिक कालसर्प योग शांति विधान करना चाहिए|

कभी कबार कुछ नवग्रह राहु केतू की दुसरी ओर या फिर उनके दायरेसे बाहर भी होते है | इस स्थिति को अर्ध कालसर्प योग कहते है |

जन्म कुंडली मे कालसर्प योग आने से आपको जीवन मे बहुत समस्याओं का सामना करना पडता है |
हम बहुत पैसा कमाते है पर न जाने वह किस तरह चला जाता है और हमेशा धन का अभाव बना रहता है |
इस योग के कारण आपके मन में बूरे खयाल आते है और आपका मन घबरा जाता है |
यह योग आपकी पढाई में बाधा डालता है और अपको शादी करने मे भी समस्या होती है |
कालसर्प योग आपके व्यवसाय में भी बाधा डालता है |
पति पत्नी के बिच मतभेद और झगडा होना यह भी कलसर्प योग के कारन होता है |

इस लिये उपर दिये गये सभी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिये कालसर्प दोष निवारण पूजा और कालसर्प शांती पू्जा करना जरूरी है |

कालसर्प शांती पूजा मे सर्प देव मुख्य देवता होते है |
आपकी इच्छा नुसार आप सर्प देव कि छोटी सोने कि प्रतिमा ला कर उसकी पूजा कर के पंडितजी को दान कर सकते है या फिर कोइ और दान कर सकते है|

महत्वपूर्ण सुचना :
कालसर्प शांती पुजा 1 दिन मे संपन्न की जाती है |
पूजा के लिए पुरुष नये वस्त्र जैसे कुर्ता-पजामा, धोती-कुर्ता स्त्रियों के लिए साडी-ब्लाऊज एवं पंजाबी ड्रेस आदि वस्त्र लाना जरुरी है |
पूजा में बैंठने वाले सभी भक्त काले और हरे रंग के कपडे ना पहने

त्र्यंबकेश्वर में रहने की सुविधा
त्र्यंबकेश्वर में रहने की सुविधा एकदम आरामदायक और सुविधापूर्ण है |
एसी/नाँन एसी होटल, अलग कमरे और धर्मशाला यात्रीयों के लिये उपलब्ध है |
यदि पूजा के कुछ दिन पहले सूचित किया जाये तो हम आपके लिये आपके रहने की सुविधा का प्रबन्ध कर सकते है|
कृपया यहॉंपर ठहरनेके लिए रूम उपलब्ध होने हेतू आयडेंटी प्रुफ जैसे ड्रायव्हिंग लायसन, पॅन कार्ड साथ लाना जरुरी है|

कृपया ध्यान दे: रहने का खर्च पूजा के खर्च से अलग होगा |

श्री श्रेत्र त्र्यंबकेश्र्वर स्थानपर किसी भी धार्मिक विधी्की जानकारी के लिए श्री. पंडित . देव कुमार शर्माजी को आप फोन / मोबाईल (0253-2621153, +91 8605659769 /+91 9890391437) पर संपर्क कर सकते है|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *